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अगली पीढ़ी के अत्याधुनिक युद्धक विमान बनाएगा अडानी समूह

करीब आठ साल पहले रक्षा उत्पादन क्षेत्र में कदम रखने वाले अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने छोटे हथियारों और कारतूस बनाने में तो वैश्विक मानकों के अनुरूप दर्जा प्राप्त किया ही है, साथ ही ड्रोन, मानव रहित युद्धक विमान, ड्रोन रोधी प्रतिरक्षा कवच तैयार करने में साख बनाई है।

31 Aug 2025

 अगली पीढ़ी के अत्याधुनिक युद्धक विमान बनाएगा अडानी समूह

कानपुर। अडानी समूह ने आपरेशन सिन्दूर में ड्रोन एवं अन्य रक्षा उपकरणों की गुणवत्ता साबित होने के बाद देश में पांचवीं पीढ़ी के अत्याधुनिक युद्धक विमान (एमका) के विकास के लिए भी दिलचस्पी जाहिर की है।

करीब आठ साल पहले रक्षा उत्पादन क्षेत्र में कदम रखने वाले अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने छोटे हथियारों और कारतूस बनाने में तो वैश्विक मानकों के अनुरूप दर्जा प्राप्त किया ही है, साथ ही ड्रोन, मानव रहित युद्धक विमान, ड्रोन रोधी प्रतिरक्षा कवच तैयार करने में साख बनाई है।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष राजवंशी ने यहां पत्रकारों से बातचीत में बताया कि देश में अगली पीढ़ी के मध्यम श्रेणी के उन्नत युद्धक विमान बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने अभिरुचि पत्र आमंत्रित किये हैं जिसकी अंतिम तिथि 30 सितंबर है। हिन्दुस्तान एयरोनॉटिकल्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ ही अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भी अभिरुचि जाहिर की है। उन्होंने कहा, "देखिए, सरकार किसको मौका देती है।"

उन्होंने कंपनी के उच्च कोटि के रक्षा उत्पादों की जानकारी देते हुए बताया कि आपरेशन सिन्दूर में उनके बनाए अनेक प्लेटफॉर्म्स का प्रदर्शन शानदार रहा है और इन हथियारों ने दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों और सैन्य संसाधनों को झूल धूसरित कर दिया।

अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने छह प्रकार के छोटे हथियारों के साथ ही उनके लिए कारतूसों तथा विविध प्रकार के ड्रोन एवं एंटी ड्रोन सिस्टम और मानव रहित विमान सिस्टम का निर्माण शुरू किया है। डिफेंस कॉरीडोर के अंतर्गत हथियारों का निर्माण ग्वालियर में, कारतूसों का उत्पादन कानपुर में तथा यूएवी, ड्रोन आदि का निर्माण हैदराबाद में हो रहा है। इनमें कामीकाजी ड्रोन भी शामिल हैं।

श्री राजवंशी ने बताया कि कंपनी की कानपुर फैक्ट्री की कारतूस बनाने की क्षमता अगले कुछ महीनों में दोगुनी हो जाएगी। इसके अलावा जल्दी ही कारतूसों के प्राइमर और 155 मिलीमीटर की तोपों के गोले भी कानपुर में बनने लगेंगे और मिसाइलों में बारूद भरने का काम भी कानपुर स्थित एम्युनेशन काम्प्लेक्स में किया जाएगा। अभी प्राइमर को बाहर से मंगाना पड़ता है।

श्री राजवंशी ने हाल ही में यूरोप, पश्चिम एशिया और आपरेशन सिन्दूर में सैन्य अभियानों में युद्धकला में आए बदलावों की चर्चा करने पर श्री राजवंशी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में जो भी युद्ध हुए उन सभी में पैदल सेना (इंफेंट्री) ने दूसरे देश की सीमाओं के पार जाकर युद्ध नहीं किया है, ना ही युद्धक विमान दूसरे देश में जाकर हमले कर रहा है, बल्कि अब युद्धभूमि पूरी तरह से बदल चुकी है। अब युद्ध बिना मशीनों और तकनीक से लड़े जा रहे हैं, चाहे वो रूस युक्रेन युद्ध हो या फिर ऑपरेशन सिंदूर रहा हो। सूचना तंत्र, मशीन एंड आर्टिफिशियल इंटेंलिजेंस यहीं युद्ध का स्वरूप है। अब लड़ाई ड्रोन से लड़ी जा रही है। आने वाला वक्त फाइटर जेट से ज्य़ादा ड्रोन का होगा। साथ ही रोबोट तैयार हो रहे हैं, जोकि युद्ध के मैदान में खुद ही फैसला ले पाएगा, इसलिए युद्ध जीतने के लिए पारंपरिक संसाधनों के साथ साथ तकनीक पर भी ध्यान देना होगा।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के बाद डिफेंस सेक्टर में आए बदलाव के बारे में कहा कि 15 मई के बाद काफी बदलाव आया है, डिफेंस इंडस्ट्री के साथ साजो सामान खरीदने में अब डिफेंस मैन्यूफैक्चर्स के साथ बात की जा रही है। 2047 में विकसित भारत की बात में डिफेंस सेक्टर को काफी तवज्जों दी जा रही है। अभी तक डिफेंस प्रोजेक्ट लगाने वालों को बैंकों से कर्ज़ नहीं मिलता था, लेकिन अब सरकार इस सेक्टर के लिए क्रेडिट लाइन खोलने जा रही है।

अडानी डिफेंस अगले कुछ सालों में कितना निवेश करने जा रही है? इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि गोला बारुद के लिए कंपनी अगले कुछ सालों में 7000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी, इसके साथ साथ कानपुर की इस फैक्ट्री में मिसाइल भी बनाई जाएगी, जिसके लिए 10 लाख डॉलर का निवेश किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जल्द ही हम बड़े कैलिबर यानि बड़े गोलों का उत्पादन शुरु कर देंगे। हमारी कोशिश है कि कानपुर की इस फैक्ट्री में सभी तरह की गोलियां एवं गोले बनाएं जाएं। जल्द ही हम यहां पर प्राइमर और बारुद का प्लांट चालू करेंगे। इसके साथ ही ग्वालियर की फैक्ट्री का उत्पादन भी जल्द ही लगभग दोगुना हो जाएगा।

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